Exam Live : बिहार बोर्ड और CBSE वालों का परीक्षा से पंगा, बात ‘कमाल’ की नहीं ‘माल’ की है

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Exam Live : विद्यार्थी लोग का लाइफ में एक परमानेंट डेटिंग होता है – परीक्षा. हर महीने, छह महीने, साल भर में मिलना है. मिलने से पहले पूरा तैयारी करना है. उसके सामने बैठ कर तीन घंटा पसीना-पसीना होना है और अंत में घर आकर पिताजी से जूता खाना हैं. आएं जी, इहे प्रक्रिया है ना पूरा.? आइए आपको परीक्षा भवन के बाहर का चक्कर लगवाते हैं. एक घंटा में पेपर शुरू होने वाला है. हॉल के बाहर दो टाइप का विद्यार्थी दिख रहा है. एक सीबीएसी, दूसरा बिहार बोर्ड. सीबीएसी वाला सब किताब लेकर कोना पकड़ के रट्टाफिकेशन दे रहा है, इधर बिहार बोर्ड वाले का डीलिंगवे कम नहीं हो रहा.

“ए कमलेश, ऊ लाल चश्मा वाली को देखो. केतना पढ़ेगी जी! बताइए अभी तक पढ़ रही है. इहे सब ता टॉप कर जाती है!”

सीबीएसी वाले सॉफिस्टिकेटेड दिख रहे हैं, बिहार बोर्ड वाले लड़बहेर. सीबीएसी वालों की मम्मा आयी हैं पेपर दिलवाने. बेटा पढ़ रहा है, मम्मा कबो पर्स से संतरा छील के खिला रही है, कबो जूस पिला रही है त कबो पॉपकॉर्न. बिहार बोर्ड वाला समोसा के ठेला पर तब तक समोसा आ हरा वाला चटनी पेलेगा, जब तक पेट ना गुड़गुड़ा जाए.

एग्जाम के एक हफ्ता पहले से सीबीएसी वालों की मम्मा उनके डाइट का ख्याल रख रही हैं. बेटू अभी जंक फूड नहीं, नहीं-नहीं, एग्जाम्स के बाद मैं खुद आपको केएफसी में ट्रीट दूंगी. बिहार बोर्ड वाला एग्जाम हॉल के बाहर तक बतिया रहा है “रात में काला नमक चाट के नहीं पीना था बे, अभी तक माथा टनक रहा है!”

सीबीएसी वालों के पेरेंट्स बच्चा को कार में लेकर आए हैं, बच्चा एग्जाम देकर निकलेगा. मम्मा को हग करेगा, जूस पिएगा आ कार में बैठ के चल देगा. बिहार बोर्ड वाला टेम्पू में बैठ के आया है. उसको टेंशन है जाते टाइम कैसे मैनेज होगा.! एग्जाम हॉल में उसका टेंशन है “साला, दस मिनट का रस्ता था, टेम्पू वाला चालीस रुपया ले लिया. ना-ना जाते टाइम थोड़ा दूर पैदल जाएंगे, फिर मेन रोड से नगर निगम वाला बस पकड़ेंगे. स्टेशन तक का भाड़ा 7 रुपया. 15 रुपए का लिट्टी, 8 का चाय आ 10 का गोल्ड फ्लेक. हो गया 40 का पूरा एस्टीमेट.”

परीक्षा शुरू है. सीबीएसी वाला/वाली सब धड़ाधड़ कॉपी भर रहा है. उनका एक्स्ट्रा सीट का प्लानिंग भी बन रहा है. बिहार बोर्ड वाले की कापी पर नया फिलॉसफी लिखा जा रहा है. नया थ्योरम रचा जा रहा है. रसायन का नया सूत्र दुनिया के सामने रखा जा रहा है. इतिहास को लेकर नया ही दृष्टिकोण पैदा किया जा रहा है. राजनीतिशास्त्र में नीति का ऐसा मौलिक-मौलिक परिभाषा वर्णित किया जा रहा है कि विदुर और चाणक्य तक पानी-पानी हो जाए.

यह बिहार बोर्ड वालों की कमज़ोरी नहीं है, यह उनका सिस्टम के प्रति कॉन्फिडेंस है. मास्टर साहब को एक कॉपी चेक करने का तीस रुपया मिलता है, ऊ अधिक से अधिक कॉपी का टारगेट रखेगा कि अकबर का वंशावली चेक करेगा! लिख दो, जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर के पिता का नाम राकेश रोशन था.! तुझे देखे मेरी आँखें, इसमें क्या मेरी खता है पदावली के रचयिता विद्यापति हैं. जब एल्कीन पर जल की अभिक्रिया तनु H2SO4 की उपस्थिति में की जाती है तो अल्कोहल बनता है पर इस प्रयोग को झारखंड, यूपी या बंगाल जाकर करें. इधर करने पर कुर्की-जब्ती हो सकता है.

रिजल्ट का दिन आया है. सीबीएसी वालों की मम्मा करण जौहर के फिलिम में जया बच्चन के तरह आरती का थाली लेकर रिजल्ट का वेट कर रही हैं. बिहार बोर्ड वाले के वालिद साहब अनुराग कश्यप के मनोज वाजपेयी के तरह कट्टा, बेल्ट, जूता का पुख्ता इंतजाम रखे हैं. कभी भी रिजल्ट आ सकता है. सीबीएसी वाला का रो-रोकर आंख सूज गया है “मम्मा ओनली 92% मम्मा.! यू नो कितनी स्टडी की थी मैंने..”

बिहार बोर्ड वाला 48% पर जितना खुश हो रहा है, हमको लग रहा है ज़िंदगी का कोई इम्तिहान इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता..!

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अमन आकाश (Aman Akash), बिहार
असिस्टेंट प्रोफेसर, पीएचडी रिसर्च स्कॉलर
साभार : Facebook

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