माँ गंगा की गोद में तैर रही लाशों का कौन गुनेहगार ?

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देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान इंसान मर रहे हैं या इंसानों की इंसानियत? डेढ़ साल से चले आ रहे मौत के इस तांडव वाले काल में भगवान तू और क्या-क्या दिखाएगा? एक-एक सांस के लिए लोगों को मरते तो देख लिए अब और क्या बाकी था ?

कभी-कभी तो ऐसा लगता है की हम सब किसी हॉलीवुड फिल्म के किरदार हैं। जहां एक वायरस की वजह से पूरी दुनिया तबाह हो रही है दुनिया भर के साइंटिस्ट इस वायरस के लिए एंटीडोट बनाने में लगे हैं। जहां फिर एक सुपर हीरो निकलकर आएगा और पूरी दुनिया को इस वायरस की चपेट से बाहर निकालेगा। लेकिन यह तो असल जीवन में है। जो डेढ़ साल से चला आ रहा है। ना जाने और क्या कुछ देखने सुनने को बचा है?

ऑक्सीजन के लिए मरीजों के परिजन का भटकते हुए दिखा।

2.5 हजार के इंजेक्शन को 50000 में बिकते देखा।

एक-एक सांस के लिए लोगों को मरते देखा।

श्मशान घाटों के बाहर शवों को कतार में लगते देखा।

कब्रिस्तान में शवों के लिए मिट्टी कम पड़ते देखा।

क्या यह सब कम थे जो अब गंगा में लाशों को बहते भी देखना पड़े?

जो गंगा उत्तराखंड से शुरू होती हुई उत्तर प्रदेश के रास्ते बिहार आती है और बंगाल के रास्ते बंगाल की खाड़ी में गिरती है। जिस गंगा में लोग स्नान कर अपने पापों को धोते थे आज उस गंगा में लाशें बह रही हैं। गंगा में लाशों का मिलना कोई नई बात नहीं है लेकिन इतनी ज्यादा संख्या में और लगातार मिलना यह चिंता का विषय है।

बिहार के बक्सर जिले में तकरीबन 70 से अधिक और बक्सर से सटे उत्तर प्रदेश के जिले गाजीपुर में 23 से अधिक लाशें मिल चुकी है। यह सिलसिला बस बक्सर और गाजीपुर तक सिमट कर नहीं रहा। राज्य में जब लाशों के बहाने की घटना सामने आई तब यूपी बिहार के अधिकारियों के कान खड़े हो गए । क्योंकि यह एक या दो लाशों की बात नहीं थी तकरीबन 100 के करीब यूपी बिहार की गंगा में लाशों का बहना देखा जा रहा है। आज और कल में नहीं बल्कि चार-पांच दिनों से रोज लाशें गंगा में बहती मिल रही है।

बिहार और उत्तर प्रदेश के गंगा नदी से हर दिन लाशों को निकाला जा रहा है। जब अधिकारियों से इस विषय पर पूछा गया तो वे इसे बिहार की परंपरा बता कर अपना पलड़ा झाड़ लिये। अभी इन लाशों की अधिकारिक जांच हो हीं रही है कि अब उन्नाव से एक और भयावह तस्वीर सामने आ रही है। जहां गंगा के किनारे ही लोगों ने शवों को रेत में दफना दिया। शुक्लागंज हाजीपुर के रौतापुर गंगा घाट पर रेत में कब्रगाह देख हर कोई चौक जाएगा। कहा जा रहा है कि श्मशान घाट पर लकड़ियां कम पड़ने और महंगी मिलने के कारण लोगों ने हिंदू रीति रिवाजों को छोड़ शवों को दफनाना शुरू कर दिया है। रौतापुर घाट पर पिछले 20 दिनों से यही भयावह नजारा देखने को मिल रहा है। दूरदराज से आने वाले लोग शवों को दफन कर रहे हैं।

जहां कोरोना से लोग लड़ ही रहे हैं कि अब ब्लैक फंगस से कई राज्य परेशान हो गए हैं। जहां ब्लॉक फंगस से महाराष्ट्र गुजरात सहित कई अन्य राज्यों में लोगों की मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है और प्रशासन आंकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त हैं। गंगा के तमाम घाट, जहां लोग महीनों में जाते थे, वहां अब अंतिम संस्कार के लिए लाइन लग रही है। रौतापुर घाट पर पिपरी, लंगड़ापुरवा, मिर्जापुर, भटपुरवा, राजेपुर, कनिकामऊ समेत दो दर्जन गांवों के लोग यहां अंतिम संस्कार करने जाते हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस घाट पर कुछ दिनों में तकरीबन 400 स्वरूप का अंतिम संस्कार किया गया है। इनमें से कईयों को तो दफना दिया गया है।