केंद्र की कटौती, क्या धीरे होगी Bihar के विकास की रफ्तार

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बिहार आधुनिकता की दौड़ में खुद को आगे रखने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। बिहार basic infrastructure में खुद को बेहतर साबित करते हुए आगे बढ़ रहा है। बिहार में कई पुल और सड़कों का निर्माण काफी तेजी से हो रहा है। इसी को देखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नए वित्तीय वर्ष के लिए बिहार में नेशनल हाईवे के लिए लगभग ₹3000 करोड़ की घोषणा की है। इस राशि को बिहार में नेशनल हाईवे सड़कों के विकास पर निवेश किया जाएगा और बिहार के सड़क परियोजना पर चल रहे काम में तेजी लाई जाएगी।

केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष में बिहार में नेशनल हाईवे के लिए मिले बजट

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा बिहार के लिए 2988 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। यह मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए स्वीकृत वार्षिक योजना के अंतर्गत दूसरी किस्त है। इससे पहले, पहली किस्त के रूप में तीन हज़ार करोड़ रूपये की कार्ययोजना को स्वीकृति मिली थी। अनुमान लगाया गया था की जून में दूसरी किस्त के रूप में बिहार के लिए तीन हज़ार करोड़ रूपए की मंजूरी दी जायेगी, लेकिन इसमें थोड़ी कटौती कर इसे 2988 करोड़ रूपए स्वीकृत की गयी है। बिहार को केंद्र की तरफ से NH की वार्षिक योजना की ये जो दूसरी किस्त दी गई है उसे इस कार्ययोजना की अंतिम किस्त मानी जा रही।

नए वित्तीय वर्ष के लिए केंद्र के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मन्त्रालय को बिहार की तरफ से 11000 करोड़ रूपये की कार्ययोजना भेजी गई थी। अन्य राज्यों के लिए स्वीकृत राशि की बात करें तो वार्षिक परियोजना की राशि के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है। जिसके तहत कुल 23,027 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। और बिहार के पड़ोसी राज्यों की बात करे तो यूपी के लिए 12,489 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गयी है। वही बंगाल के लिए 1,601 करोड़ रूपए स्वीकृत की गयी है। और झारखंड के लिए 3,460 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना को स्वीकृति मिली।

इस वार्षिक परियोजना की राशि को मंजूरी मिलने के बाद बिहार मे सड़क निर्माण के कार्य मे तेजी आएगी। जिसमें रामजानकी पथ के तहत यूपी की सीमा से सिवान तक 36 किमी की सड़क तथा भागलपुर से हंसडीहा होते हुए झारखंड सीमा तक जाने वाली सड़क को फोर लेन में विकसित किए जाने का योजना है।