Tokyo Olympic : आयोजन पर सवाल अब भी बरकरार, क्या होगा IOC का फैसला!

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टोक्यो ओलम्पिक (Tokyo Olympic) में केवल दो महीने शेष हैं। कोरोना महामारी से बिगड़े हालत को देखते हुए इसे रद्द करने के लिए उठ रही मांग दिन प्रतिदिन बुलंद हो रही है। पर जापान की ओर से इसे ले कर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। ऐसे में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर जापान क्यों ओलम्पिक खेलों को रद्द नहीं कर रहा?

जापान के हालात भी कोरोना के कारण बिगड़े हुए हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर राजधानी टोक्यो और तीन अन्य प्रमुख प्रान्तों में आपातकाल की स्थिति को बढ़ा दिया गया है। इनके बावजूद ओलंपिक खेलों को रद्द करने को ले कर या स्थगित करने को ले कर कोई फैसला नहीं लिया जा रहा है। जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ओलंपिक के आयोजन एक सही निर्णय नहीं है साथ ही साथ जनता भी इस से नाखुश नजर आ रही है।

जापान में करंट पोल से पता चलता है कि लगभग 70% आबादी नहीं चाहती कि ओलंपिक का आयोजन हो, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) इस बात पर अडिग है कि आयोजन होगा।
जापान ने लंबे समय से इस बात और जोर दिया है कि ओलंपिक खेल जो कि पिछले साल आयोजित होने थे वो इस साल आयोजित किये जायेंगे और पूरी सुरक्षा इंतजामों के साथ होंगे।

हाल ही में जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा (Yoshihide Suga) ने कहा कि सरकार ओलंपिक को जनता से पहले नहीं रखेगी। इस से जाहिर है कि पब्लिक ओपिनियन के आगे सरकार झुक रही है। पर प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय आईओसी (IOC) पर निर्भर है।

वास्तव में खेलों को रद्द करने की शक्ति कौन रखता है?

आईओसी (IOC) और मेजबान शहर टोक्यो के बीच अनुबंध सीधा है: रद्द करने के संबंध में एक लेख है और यह केवल आईओसी को रद्द करने का विकल्प देता है, मेजबान शहर को नहीं।

ऐसा इसलिए है क्योंकि ओलंपिक खेल आईओसी की “अनन्य संपत्ति” हैं, और खेलों के “मालिक” के रूप में, यह आईओसी है जो उक्त अनुबंध को समाप्त कर सकता है। फिलहाल टोक्यो ओलंपिक के रद्द होने की संभावना है या नहीं ये सवाल अब भी बरकरार है।