MLC चुनाव से पहले RJD में विरोध तेज, VIP और लोजपा के उम्मीदवारों ने बढ़ाई चिंता

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PATNA : बिहार में MLC चुनाव की सरगर्मी तेज है। समय के साथ चुनाव दिलचस्प भी होता जा रहा है। महागठबंधन और एनडीए की मुश्किलें बढ़ाने के लिए वीआईपी और लोजपा ने भी कमर कस ली है। पार्टी के बागियों ने भी उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है।

नवादा में राजद जिलाध्यक्ष का इस्तीफा और मधुबनी में गुलाब यादव के विरोध ने राजद नेतृत्व को संकट में डाल दिया है। इन सब के बीच कोसी निकाय कोटे से भी राजद की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। यहां से राजद ने वर्तमान एमएलसी नूतन सिंह के खिलाफ डॉ अजय सिंह को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन वीआईपी से नंदन कुमार की दावेदारी ने अजय सिंह की मुश्किलें बढ़ा दी है।

नंदन कुमार यादव जाति से आते हैं और लंबे समय से सहरसा में मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान चलाते हैं। इस कोचिंग संस्थान से सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने अच्छा परिणाम हासिल किया है। इलाके में संस्थान को विश्वसनीय माना जाता है। चर्चा है कि हर प्रखंड में उनके छात्रों की पहुंच है जिसकी वजह से प्रतिनिधियों से भी मेल जोल है। ऐसे भी यादव समुदाय के कई जन प्रतिनिधि अजय सिंह की उम्मीदवारी से सहज नहीं थे। ऐसे में उनके लिए नंदन कुमार उन्हें साधने की कोशिश करेंगे। उनकी यह कोशिश जितनी मजबूत होगी, राजद उतना ही परेशान होगा।

उधर श्रवण कुमार कुशवाहा को नवादा से राजद का विधान परिषद प्रत्याशी बनाया गया है। इस खबर के साथ ही नवादा राजद में नाराजगी साफ-साफ दिखने लगी है। आलाकमान द्वारा नाम की घोषणा के साथ ही राजद जिलाध्यक्ष महेन्द्र कुमार ने इस्तीफा दे दिया है। यूं तो उन्होंने कोई भी कारण नहीं बताया है लेकिन राजनीतिक जानकार इसे सीधे-सीधे पार्टी में विद्रोह का सूत्रपात ही मान रहे हैं। माना जा रहा है कि प्रत्याशी के नाम की घोषणा के साथ ही उठ पड़े विरोध के स्वर से पार्टी की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है।

उल्लेखनीय है कि नवादा में प्रत्याशी चयन को लेकर जारी खींचतान का असर ही था कि इस सीट पर राजद आलाकमान को देर से नामों की घोषण करनी पड़ी। कुछ दिनों पूर्व भीतरखाने श्रवण कुमार कुशवाहा का नाम उछल कर सामने आया था जिसके बाद कड़ा विरोध जताया गया था।

आखिर तक टालने के बाद एक बार फिर से सारी स्थिति का आकलन कर श्रवण के ही नाम पर मुहर लगा कर राजद आलाकमान ने इशारा कर दिया कि वह अपने निर्णय को लेकर रिवर्स गीयर नहीं लगाने वाला। हालांकि पार्टी में उठे विद्रोह के बाद पार्टी के निर्णायकों का आगे क्या फैसला होता है, यह देखने वाली बात होगी।

भारी खींचतान के बाद श्रवण के नाम की घोषणा तो हो गयी है लेकिन अंदरूनी विवादों से निपटते हुए अपने लिए जीत दर्ज कर पाना श्रवण कुमार कुशवाहा के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल तो श्रवण खेमा प्रसन्न है और राजद आलाकमान के फैसले को पूर्व निर्धारित करार दे कर आगे की रणनीति में जुट गया है। श्रवण कुशवाहा ने पिछली बार एमएलसी का चुनाव भाजपा उम्मीदवार के तौर लड़ा था।

जदयू के सलमान रागिव को श्रवण ने कड़ी टक्कर दी थी लेकिन उस वक्त भी भाजपा के एक विधायक का साथ नहीं मिलने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा था और उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था। बाद में उन्होंने गोविंदपुर से 2015 में विधानसभा का चुनाव, नवादा से 2019 का उप चुनाव और 2020 में नवादा से विधान सभा चुनाव लड़ा था। उनकी उल्लेखनीय स्थिति तो रही लेकिन जीत से दूर ही रहे। और स्थानीय राजद कमेटी की नापसंदगी के बीच वह अपने लिए जीत की राह कैसे आसान कर पाते हैं, यह तो वक्त ही बताएगा।