जानिए क्या है MLC चुनाव का समीकरण, 3-3 सीटों पर NDA और महागठबंधन की जीत तय, एक पर सस्पेंस

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PATNA : बिहार विधान परिषद (Bihar Legislative Council) में विधानसभा कोटे की सात सीटों पर चुनाव की घोषणा कर दी गई है. भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने 20 जून को मतदान की तारीख घोषित की है. बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी MLC के चुनाव होंगे.

बता दें कि जुलाई में खाली होने वाली बिहार विधान परिषद की सात सीटों में एनडीए को तीन और महागठबंधन को तीन सीटें मिलेंगी. वैसे रिक्त होने वाली सभी सात सीटों में अभी एनडीए के पास छह और एक वीआईपी की हैं. बीजेपी ने अभी मुकेश सहनी को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं इसलिए एक सीट पर अभी सस्पेंस बरक़रार है. विधानसभा कोटे की इन सात सीटों में फिलहाल जदयू के पास पांच सीटें हैं, जबकि एक-एक सीट भाजपा और वीआईपी के पास है.

2016 में सातों सीटों का गणित कुछ और ही था. तब राज्य में महागठबंधन की सरकार थी. उस समय जदयू के पास दो, राजद के पास दो, भाजपा-कांग्रेस और वीआईपी के पास एक-एक सीट थी. बाद में राजद के दोनों विधानपार्षद व कांग्रेस के एकमात्र विधानपार्षद जदयू में शामिल हो गए.

रिटायर होने वालों में जदयू के गुलाम रसूल बलियावी, सीपी सिन्हा, कमर आलम, रणविजय सिंह, रोजिना नाजिम, वीआईपी के मुकेश सहनी और भाजपा के अर्जुन सहनी शामिल हैं. रोजिना नाजिम अपने पति तनवीर अख्तर के दिवंगत होने के बाद उसी सीट पर हुए उपचुनाव में जीतकर आई हैं. कमर आलम, कुमार रणविजय सिंह राजद से जबकि तनवीर अख्तर कांग्रेस से जीतकर आए थे. बाद में ये जदयू में शामिल हो गए.

विप चुनाव में एक सीट के लिए 31 वोट की जरूरत है. इस तरह भाजपा और राजद के 2-2 जबकि जदयू की एक सीट पर जीत तय है. छठी सीट पर भाजपा-जदयू के शेष वोटों से एनडीए के उम्मीदवार की जीत भी निश्चित है. तीन उम्मीदवारों की जीत पक्की के बाद भाजपा के पास 15 व जदयू के पास 14 वोट बचेंगे. हम के चार व एक निर्दलीय वोट को जोड़कर एनडीए की चौथी सीट भी तय है.

राजद की दो सीटों पर जीत तय है. तीसरी सीट भी उसे या उनके सहयोगी को मिलनी तय है, क्योंकि अपने दो उम्मीदवारों की जीत पक्की करने के बाद उसके पास 14 वोट अतिरिक्त होंगे. माले के 12 वोट जोड़ने से उसके पास 26 वोट हो जाते हैं. वामदलों के चार वोट से यह संख्या 30 हो जाती है. इतनी संख्या किसी और के पास नहीं है, क्योंकि ओवैसी की पार्टी AIMIM के पांच विधायक हैं.

उनका किसी खेमे में रहने न रहने से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ने वाला. लिहाजा, सातवीं सीट पर भी महागठबंधन की जीत पक्की है. सातवीं सीट पर माले और कांग्रेस का दावा बन सकता है. ऐसा हुआ तो विधानपरिषद में राजद के सहयोग से माले की पहली बार इंट्री पक्की हो जाएगी. कांग्रेस यदि अकेले लड़ी तो 19 वोट लेकर भी रिजल्ट पर असर डालने की स्थिति में नहीं है, लेकिन राजद की मदद से जीत मिल सकती है.