Himanta Biswa Sarma : अब असम का कमान हिमंता बिस्वा सरमा के हाथ, हाथ का साथ और कमल के दामन का सफर

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हिमंता बिस्व सरमा(Himanta Biswa Sarma) असम के 15वें मुख्यमंत्री बन चुके हैं। उन्होंने आज असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली।

राज्यपाल जगदीश मुखी ने हिमंता बिस्व सरमा के साथ ही 13 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। उन्हें सर्बानंद सोनोवाल(Sarbanand Sonowal)के इस्तीफे के बाद असम राज्य की कमान सौंपी गई है।

हिमंता बिस्व सरमा असम की जालुकबारी विधानसभा सीट से लगातार पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं। हिमंता बिस्व सरमा इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार रामेन चंद्र बोर ठाकुर को हराकर विधानसभा पहुंचे है। इससे पहले वह सोनोवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं।

  • हिमंता बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने 2015 में कांग्रेस से मतभेद के बाद हाथ का साथ छोड़ कमल का दामन थामा था।
  • हिमंता बिस्वा सरमा का जन्म 1 फरवरी 1969 हुआ था
  • 2001 से 2015 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट से असम के जलकुबारी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रहे।
  • मई 2016 तक भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में विधायक के रूप में सेवा की है।
  • शर्मा 20216 की असम विधानसभा की निर्वाचन जीतके असम के कैविनेट मंत्री बने।
  • भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर 2016 की असम विधानसभा के निर्वाचन में जीतकर शर्मा असम के कैबिनेट मंत्री बने।

मुख्य बिंदु

1991-1992 : राजनीति में प्रवेश करने से पहले हिमंता बिस्वा शर्मा कॉटन कॉलेज यूनियन सोसाइटी (सीसीयूएस) के महासचिव (जीएस) थे।

1996-2001 : वह 1996 से 2001 तक गौहती उच्च न्यायालय में भी लॉ प्रैक्टिस की थी।

2006 : वह फिर से दूसरी बार जलुकबारी से असम विधान सभा के लिए चुने गए थे।

2011 : तीसरी बार, कांग्रेस नेता असम विधान सभा के लिए 75,000 से अधिक मतों के अंतर के साथ चुने गए थे।

2014 : पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के साथ राजनीतिक मतभेदों के बाद डॉ। शर्मा ने 21 जुलाई 2014 को कांग्रेस पार्टी के सभी विभागों से इस्तीफा दे दिया।

2015 : वर्ष 2015 में डॉ शर्मा के करियर में बदलाव आया क्योंकि कांग्रेस नेता ने पार्टी छोड़ने का फैसला किया और बाद में 23 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।

2016 : उन्होंने लगातार चौथे कार्यकाल के लिए जलुकबारी निर्वाचन क्षेत्र जीता। उन्होंने 24 मई 2016 को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली थी। नेता को वित्त, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, शिक्षा, योजना और विकास, पर्यटन, पेंशन और लोक शिकायत जैसे विभाग आवंटित किए गए हैं।

126 सीटों वाली विधानसभा में, बीजेपी ने 60 सीटें जीतीं जबकि उसके गठबंधन सहयोगी असोम गण परिषद (एजीपी) ने नौ सीटें जीतीं और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) ने छह सीटें जीतीं। दूसरे स्थान पर रही कांग्रेस ने 29 सीटें जीतीं और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) ने 16 सीटें जीतीं। बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने चार सीटें जीती थीं।

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