बॉस भूपेंद्र से नहीं ‘प्रधान’ से मिले CM नीतीश, बंद कमरे में हुई ये बातचीत, भाजपाइयों को भनक तक नहीं

Share It

PATNA : बीते दिन बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने उत्तर प्रदेश (UP) में बीजेपी को प्रचंड जीत दिलाने वाले यूपी के चुनाव प्रभारी और मोदी कैबिनेट में मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) से मुलाकात की. इस सरप्राइज मीटिंग में CM नीतीश और बीजेपी के टॉप लीडर धर्मेंद्र प्रधान के बीच क्या बातचीत हुई. इसपर काफी चर्चा हो रही है. क्योंकि इस गोपनीय बैठक की भनक भाजपाइयों को भी नहीं थी.

CM के साथ सरप्राइज मीटिंग
सीएम नीतीश और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच हुई गुप्त मीटिंग को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं. मसलन, बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार, नई शिक्षा नीति, आगामी राष्ट्रपति चुनाव और उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चा जोरो पर है. बिहार की एक राज्यसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा होते ही धर्मेंद्र प्रधान का अचानक पटना पहुंचना और सीएम से मिलना. ये बात भी लोगों को पच नहीं रही. आपको बता दें कि जनता दल यूनाइटेड के राज्यसभा सदस्य किंग महेंद्र प्रसाद के निधन के बाद ये सीट खाली हुई थी.

सिपहसालार विजय चौधरी भी साथ
सीएम नीतीश से मिलने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने उनके सिपहसालार और बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री विजय चौधरी से भी मुलाकात की. विजय कुमार चौधरी ने इस मुलाकात के पीछे समग्र शिक्षा के तहत निरंतर कम हो रही केंद्रीय हिस्सेदारी और केन्द्रीय विद्यालयों की स्थापना के लिए दस एकड़ जमीन की मांग की बात कही. लेकिन मीडिया सिर्फ इसे ही स्वीकार करने को तैयार नहीं. दरअसल मीडियाकर्मी, इस मुलाकात के पीछे छिपी राजनीतिक निहितार्थ का जवाब तलाशने में जुटे हैं.

नई शिक्षा नीति को लेकर चर्चा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नई शिक्षा नीति को लेकर काफी गंभीर हैं. वे स्वयं देश के विभिन्न राज्यों में प्रभावी नेताओं से बातचीत कर रहे हैं. वैसे लोगों से मिल रहे हैं, जिनकी पैठ है. प्रधान का कहना है कि नई शिक्षा नीति वैश्विक परिदृश्य में रणनीतिक परिवर्तनों के अनुरूप तैयार की गई है. यूपी, असम और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में उन्होंने खुद जाकर वहां के नेताओं से नई शिक्षा नीति पर बातचीत की है. इसलिए कहा जा रहा है कि संभव है कि बिहार दौरे पर उन्होंने सीएम नीतीश और विजय चौधरी से इस मुद्दे पर बातचीत की होगी. क्योंकि नीतीश एक बड़ा चेहरा हैं.

कई मंत्रियों की छुट्टी तय
धर्मेंद्र प्रधान और सीएम नीतीश की मुलाकात के पीछे बिहार में कैबिनेट विस्तार की बात कही जा रही है. इससे राजनीति का माहौल भी थोड़ा गर्म हो गया है. आपको बता दें कि काफी दिनों से ये चर्चा है कि बीजेपी कोटे के कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है. डिप्टी सीएम से लेकर अन्य बड़े विभागों के मंत्रियों को भी बदलने की बात सामने आ रही है. कुछ मंत्रियों को बीजेपी नेतृत्व प्रोमोट भी करना चाहती है तो कुछ नए चेहरों को शामिल भी करने का प्रयास है. 2024 के आम चुनाव को देखते हुए भाजपा की सोच है कि बिहार में जातीय समीकरण को भी साधा जाये.

प्रो ओबीसी फैक्टर को तोड़ेगी बीजेपी
बिहार बीजेपी में सवर्ण अपने आप को हाशिये पर महसूस कर रहे हैं. मुजफ्फरपुर जिले की बोचहां विधानसभा सीट पर उपचुनाव में हार के पीछे भूमिहार वोटरों की नाराजगी की बात कही जा रही है. जिससे बीजेपी नेतृत्व के माथे पर चिंता की लकीरें जाहिर हो रही हैं. बिहार बीजेपी में एक बड़ा तबका इस बात से भी नाराज है कि प्रदेश में पार्टी प्रो ओबीसी की पार्टी हो गई है. भूपेंद्र यादव के हाथ में कमान होने के कारण तीर के रूप में सिर्फ ओबीसी वर्ग के नेताओं को ही रखा जा रहा है. जिसे बीजेपी बैलेंस करना चाहती है.

प्रधान का टास्क
मूल रूप से बिहार के पड़ोसी राज्य के निवासी धर्मेंद्र प्रधान की पहचान बीजेपी के टॉप लीडरशिप के रूप में रही है. धर्मेंद्र भी ओबीसी वर्ग के नेता हैं. लेकिन जिस तरह से यूपी चुनाव में उन्होंने ओबीसी और सवर्णों के बीच आपसी तालमेल को स्थापित कर भाजपा को प्रचंड जीत दिलाई. इससे उनके प्रति केंद्रीय नेतृत्व का विश्वास पहले से ज्यादा बढ़ा है. यूपी चुनाव में पिछड़ा वर्ग इस समय बीजेपी के लिए चुनौती बना हुआ था. परिणाम ये रहा कि राजभर और निषाद समेत कुछ ओबीसी वर्ग उससे छिटक गए. जिसके बाद पार्टी ने फौरन बड़ा निर्णय लेते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और यूपी बीजेपी के प्रभारी राधामोहन सिंह का पावर काम करते हुए धर्मेंद्र प्रधान को राज्य का जिम्मा सौंप दिया. और इसके बाद यूपी का परिणाम क्या हुआ, ये जगजाहिर है.

प्रधान हैं तुरुप का इक्का
इतना ही नहीं. उधर, पश्चिम बंगाल चुनाव में नंदीग्राम सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हार के पीछे भी धर्मेंद्र प्रधान के रणनीतिक कौशल को ही लोहा माना गया. लेकिन यूपी की जीत ने भाजपा को सबसे ज्यादा प्रभावित किया. देश के बड़े पत्रकारों का मानना है कि धर्मेंद्र प्रधान को आगे चलकर अगर बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बना दिया जाये तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी. जानकारों का कहना है कि यूपी के प्रभारी रहते हुए कई नेता तुरंत बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं, चाहे वो अमित शाह हों, जेपी नड्डा हों या फिर वेंकैया नायडू हों.

प्रधान होंगे नए बीजेपी प्रमुख!
आने वाले दिनों में ओडिशा विधानसभा चुनाव और साल 2024 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान को भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी देखा जा रहा है. बिहार बीजेपी में भूपेंद्र यादव ‘बॉस’ की तरह काम करते हैं. केंद्र में मंत्री बनाये जाने के बावजूद भी बिहार से वे अलग नहीं हुए. जबकि भाजपा में एक व्यक्ति एक पद की बात कही जाती रही है. हाल के दिनों में तमाम बड़े फैसले भूपेंद्र यादव को आगे रखकर लिए गए. चाहे वो एमएलसी चुनाव हो या फिर बोचहां में उपचुनाव. कहा जाता है कि सवर्णों को नजरअंदाज कर भूपेंद्र गुट पांव जमाने में हावी रहा. जिसे बीजेपी मंत्रिमंडल में बदलाव के जरिये डैमेज कंट्रोल करना चाहती है.

नीतीश ‘पैंतरेबाज मुख्‍यमंत्री’ – धर्मेंद्र प्रधान
कभी नीतीश को ‘पैंतरेबाज मुख्‍यमंत्री’ कहने वाले धर्मेंद्र प्रधान को बीजेपी ने क्यों अचानक बिहार भेजा, इस बात की जानकारी किसी को नहीं. प्रधान के बिहार दौरे की भनक भाजपा के बड़े नेताओं को भी नहीं थी. लेकिन कहा जा रहा है कि बीजेपी में संघ से जुड़े नेताओं को प्रधान के दौरे की पहले से खबर थी. संजीव चौरसिया और नागेंद्र जी ने स्टेट गेस्ट हाउस में उनसे मुलाकात भी की थी.

ये बात मीडिया से भी गुप्त रखी गई. हालांकि एयरपोर्ट पर उनकी मुलाकात गिरिराज सिंह से हुई थी. और वापस दिल्ली जाने के दौरान प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल और बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन भी एयरपोर्ट पर ही धर्मेंद्र प्रधान से मिले. हालांकि सीएम से मुलाकात को लेकर उन्हें भी कोई जानकारी नहीं. ऐसा उन्होंने मीडियाकर्मियों को बताया.

क्या है राजनीतिक निहितार्थ ?
धर्मेंद्र के पटना आगमन और इसके राजनीतिक निहितार्थ को लेकर तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं. विजय चौधरी जो बातें कह रहे हैं. ये बातें तब भी सामने आई थीं, जब पिछले साल अगस्त महीने में उन्होंने दिल्ली में धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की थी और शिक्षा से जुड़े कई मामलों को उठाया था. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान के बिहार दौरे के पीछे बीजेपी की कोई बड़ी रणनीति है, जिसका असर निकट भविष्य में देखने को मिलेगा. यानी कि बिहार एनडीए में कोई गंभीर घटनाक्रम संभावित है.