Amrish Puri : मोगेंबो खुश हुआ, जहन में आज भी ताजा है इनके किरदार

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भारतीय फिल्मों की बात ही कुछ अलग है यहां आपके हर फीलिंगस के लिए गाने मिल जाएंगे। और फिल्मों के साथ-साथ यहां ऐसे ऐसे एक्टर मौजूद हैं जिन्हें लोग उनके मरने के बाद भी याद करते हैं। इनके द्वारा निभाए गए हर किरदार दर्शकों के दिलों दिमाग पर छप गया हो। इन्हीं अभिनेताओं में से एक हैं अमरीश पुरी (Amrish Puri)। भले ही आज यह अभिनेता हमारे बीच नहीं है लेकिन अपने समय में अपने सामने कास्ट हुए फिल्म में हीरो की एंट्री भी इनकी एंट्री के सामने पानी पानी हो जाती थी।

थियेटर्स में जब इनकी फिल्में लगती थी तो लोगों के जुबान पर हीरो के डायलॉग के बजाय विलेन का किरदार निभा रहे अमरीश पुरी के डायलॉग रहा करते थे। बॉलीवुड की दुनिया एक अलग ही दुनिया है, इसकी खास विशेषताओं में से एक है – फिल्‍मों के डॉयलाग्‍स। इंसान एक अच्छा कलाकार तभी कहलाता है जब दर्शकों के बीच उसकी पहचान उसके द्वारा निभाए गए किरदारों से की जाती है। और उससे भी ज्यादा पॉपुलर उनके द्वारा बोले गए डायलॉग से।

जैसे फिल्म शोले में गब्बर द्वारा बोला गया डायलॉग “तेरा क्या होगा कालिया” इतना प्रसिद्ध है की आज भी लोग इसे अपने आम बोलचाल की भाषा में भी इस्तेमाल करते हैं। वैसे ही अमरीश पुरी द्वारा निभाए गए कई किरदार और उससे भी ज्यादा उनके द्वारा बोले गए कई डायलॉग आज भी लोगों के मस्तिष्क में बैठा हुआ है। जैसे फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में अमरीश पुरी (कैरेक्टर का नाम चौधरी बलदेव सिंह) द्वारा फिल्म के क्लाइमेक्स में बोला गया “जा सिमरन…जी ले अपनी जिंदगी” आज फिर हम अपने फ्रेंड्स के बीच बोलते हैं। फिल्म शहंशाह में अमिताभ बच्चन का डायलॉग “रिश्‍ते में हम तुम्‍हारे बाप लगते हैं, नाम है शहंशाह” सुनते ही हम अमिताभ के ‘शहंशाह’ वाले करैक्टर से जुड़ जाते हैं। लेकिन फिल्म मिस्टर इंडिया अमरीश पुरी द्वारा कहा गया डायलॉग “मोगेंबो, खुश हुआ” तो हम सीधे अमरीश पुरी के उस करैक्टर से जुड़ जाते हैं जिसे अमरीश पुरी ने फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में निभाया है।

22 जून 1932 को जन्मे अमरीश पुरी भले ही अपने जन्म के वक्त खुश नहीं हुए होंगे लेकिन बॉलीवुड के मोगेंबो बनने के बाद वे केईयों के जीवन को जरूर रोशन किए होंगे। तो आइए जानते हैं बॉलीवुड के मोगेंबो के जीवन से जुड़ी कुछ बातों को:

अमरीश पुरी उन कलाकारों में से एक हैं जिनकी पहचान एक से ज्यादा डायलॉग से की जाती है। अमरीश ऐसे कलाकारों की सूची में अव्वल स्थान पर आज भी बैठे हुए हैं।

अमरीश पुरी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पंजाब से की थी। उसके बाद वह शिमला चले गए। शिमला के B.M. College से पढ़ाई करी। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने थिएटर्स में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे फिल्मों की तरफ बढ़े।

आपको बता दें की अमरीश पुरी के नाटक को देखने के लिए अटल बिहारी बाजपेई और इंदिरा गांधी जैसी हस्तियां थियेटर्स में मौजूद हुआ करती थी।

1960 के दशक में उन्होंने स्टेटस की दुनिया में अपने अभिनय की शुरुआत की। सत्यदेव दुबे और गिरीश कर्नाड द्वारा लिखे गए नाटकों की प्रस्तुति दर्शकों के सामने दी। थियेटर्स की दुनिया में बेहतरीन अभिनय के लिए संगीत नाटक अकादमी द्वारा 1979 में उन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया गया जो कि उस समय का उनका सबसे बड़ा पुरस्कार था।

1971 में आई फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ से उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करी थी।

अपना काफी समय थिएटर में बिताने के बावजूद भी उन्हें हिंदी सिनेमा में अपना स्थान बनाने में काफी समय लगा।

और जब उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपने आप को स्थापित कर लिया तो कामयाबी उनके कदम चूमती गयी।

1980 के दशक में उन्होंने खलनायक के किरदार को निभाते हुए दर्शकों के दिलों दिमाग पर अपनी छाप छोड़ी।

1987 में शेखर कपूर की फिल्म ‘मिस्टर इंडिया में मोगैंबो के किरदार ने अमरीश पुरी को हर किसी के दिमाग में ऐसे फिट कर दिया कि आज भी उनका यह किरदार लोगों को खूब भाता है।

1990 के दशक में अपने खलनायक किरदार के विपरीत उन्होंने सकारात्मक किरदार के जरिए फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ ‘घायल’ और ‘विरासत’ से सभी दर्शकों का दिल जीत लिया।

हिंदी के साथ साथ उन्होंने कन्नड़, पंजाबी, मलयालम, तेलुगू और तमिल फिल्मों तथा हॉलीवुड फिल्म में भी काम किया। उन्होंने अपने पूरे कॅरियर में 400 से भी अधिक फिल्मों में काम किया है।

उनके जीवन की आखिरी फिल्म ‘किसान’ थी जो कि उनके निधन के बाद साल 2005 में रिलीज की गई थी।

उन्‍होंने कई विदेशी फिल्‍मों में भी काम किया। उन्‍होंने इंटरनेशनल फिल्‍म ‘गांधी’ में ‘खान’ की भूमिका निभाई थी।

72 वर्ष की उम्र में ब्रेन ट्यूमर की वजह से 12 जनवरी 2005 को अमरीश पुरी का निधन हो गया।