BPSC पेपर लीक कांड: शिकंजे में एक बड़े IAS अफसर? बीपीएससी की चलाते हैं कोचिंग, 11:43 में मोबाइल से भेजा था क्वेश्चन

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PATNA : बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 67वीं प्रारंभिक परीक्षा (PT) के प्रश्न पत्र लीक होने के मामले में ट्रेंडिंग बिहार की टीम को अहम सुराग हाथ लगे हैं. इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम के रडार पर बिहार के एक बड़े आईएएस अफसर का नाम सामने आ रहा है, जो बीपीएससी की कोचिंग चलाते हैं और युवाओं के बीच काफी चर्चित भी हैं. ईओयू के डीएसपी द्वारा परीक्षा कैंसल होने के अगले दिन 9 मई को एक एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिसमें एक मोबाइल नंबर का जिक्र है. यह मोबाइल नंबर उसी आईएएस अफसर का बताया जा रहा है.

बड़ा खुलासा : 20 मिनट पहले पहुंचा क्वेश्चन
आर्थिक अपराध इकाई द्वारा 9 मई 2022 (सोमवार) को कांड संख्या 20/2022 दर्ज किया गया है. भारतीय दंड संहिता यानी IPC की धारा 420, 467, 468 और 120(b) एवं IT एक्ट ( IT ACT) की धारा 66 साथ ही साथ बिहार परीक्षा नियंत्रण अधिनियम 1981 की धारा 3/10 के तहत मामला दर्ज कराया गया है. आर्थिक अपराध इकाई के पुलिस उपाधीक्षक भास्कर रंजन की ओर से एफआईआर में दी गई जानकारी के मुताबिक एक अज्ञात व्यक्ति ने 8 मई को आयोजित बीपीएससी 67वीं की पीटी परीक्षा शुरू से लगभग 20 मिनट पहले मोबाइल के माध्यम से क्वेश्चन पेपर को भेजा था.

किसका है 9472***001 मोबाइल नंबर?
एफआईआर के अनुसार बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक अमरेंद्र कुमार को परीक्षा प्रारंभ होने से ठीक पहले 11 बजकर 43 मिनट पर मोबाइल संख्या 9472***001 से उनके मोबाइल नंबर 9472***281 पर BPSC के क्वेश्चन पेपर की कॉपी भेजी गई थी. मोबाइल संख्या 9472***001 बिहार सरकार के एक आईएएस अधिकारी का बताया जा रहा है, जो दूसरे कैडर के हैं. कई बार ट्रेंडिंग बिहार की टीम ने इस नंबर पर बातचीत कर जानकारी जुटाने की कोशिश की लेकिन कोई रेस्पोंस नहीं आ आ रहा है.

कौन है वो IAS अफसर
मोबाइल नंबर के आधार पर उपभोक्ता की जानकारी देने वाले बहुचर्चित मोबाइल एप्लीकेशन से पता चल रहा है कि प्राथमिकी में अंकित मोबाइल संख्या 9472***001 उसी आईएएस अफसर का है. उसमें उस अधिकारी का नाम, फोटो, नंबर और आधिकारिक ईमेल आईडी भी दिखा रहा है. ट्रेंडिंग बिहार ने जब इस मामले में आगे जानकारी इक्कठा की तो पता चला कि जो ईमेल आईडी इस एप्लीकेशन में शो कर रहा है. वही ईमेल आईडी उस आईएएस अफसर के आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी शो कर रहा है.

IAS ने ही लीक किया था एग्जाम डेट
बीपीएससी के क्वेश्चन पेपर लीक होने के बाद सोशल मीडिया पर लगातार इस आईएएस अफसर का नाम सामने आ रहा है. कहा जा रहा है कि ये आईएएस अधिकारी बीपीएससी का कोचिंग भी चलाते हैं, जो जगजाहिर है. कई बार बिहार लोक सेवा आयोग से जुड़ी जानकारी को अपने सोशल मीडिया पर पहले बता देते हैं. जो जानकारी आधिकारिक रूप से बीपीएससी की वेबसाइट पर बाद में दी जाती है, वो गोपनीय जानकारी भी ये आईएएस अपने सोशल मीडिया के माध्यम से पहले ही लीक कर देते हैं.

ट्रेंडिंग बिहार के पास पुख्ता सबूत
सोशल मीडिया पर इस बात की भी चर्चा है कि इसी आईएएस अफसर ने बीपीएससी की पीटी परीक्षा की जानकारी बिहार भर में सबसे पहले लीक की थी. घटना 28 मार्च की है. आईएएस अधिकारी ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज के माध्यम से बताया था कि 8 मई को बीपीएससी की परीक्षा होने वाली है. ट्रेंडिंग बिहार ने तकनीकी रूप से दक्ष कुछ लोगों से पूछताछ कर जानकारी जुटाई तो पता चला कि उस आईएएस अफसर ने 28 मार्च की शाम को 4 बजकर 3 मिनट पर फेसबुक पोस्ट किया जबकि उसी दिन लगभग एक घंटा बाद बीपीएससी की वेबसाइट पर 5 बजकर 3 मिनट 28 सेकेंड पर परीक्षा से संबंधित जानकारी आधिकारिक रूप से दी गई.

पेपर लीक होते ही BPSC ऑफिस में खलबली
बिहार सरकार के पावर कॉरिडोर और बीपीएससी के दफ्तर में भी इस आईएएस अफसर को लेकर तमाम तरह की बातें की जा रही है. विश्वस्त सूत्रों ने ट्रेंडिंग बिहार को बताया कि जैसे ही परीक्षा के दिन 9472***001 नंबर से बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक को सेट-C का हिंदी प्रश्न पत्र भेजा गया, उन्होंने फौरन इसकी जानकारी अपने वरीय अफसरों को दी. पेपर लीक की खबर मिलते ही अधिकारी सकते में आ गए. कहा तो ये भी जा रहा है कि तत्क्षण उसी आईएएस को कॉल कर पूछा भी गया था. लेकिन अविलंब उन्होंने इस बात से इनकार कर दिया.

आरा में हंगामे से पहले लीक हुआ था पेपर?
आर्थिक अपराध ईकाई की एफआईआर कॉपी से एक बात और स्पष्ट होती है. आरा में हंगामा शुरू होने से पहले ही बीपीएससी के दफ्तर में पेपर लीक की खबर मिल गई थी. मीडिया रिपोर्ट और परीक्षा केंद्र से जुड़े बड़े अफसरों के मुताबिक आरा में हंगामा लगभग सवा 12 बजे यानी कि 12:15 के बाद शुरू हुआ जबकि उससे आधा घंटा पहले ही बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक के पास क्वेश्चन पेपर की कॉपी पहुंच गई थी.

मगरमच्छों पर कार्रवाई होनी तय
गौरतलब है कि आर्थिक अपराध इकाई की स्पेशल टीम ने जब से इस मामले में कार्रवाई शुरू की है. तब से वो आईएएस अफसर पटना से बाहर बताये जा रहे हैं. उनके सोशल मीडिया से भी यही जानकारी मिली है. चर्चा है कि इस बीपीएससी मामले में गिरफ्तार बड़हरा के बीडीओ समेत अन्य चार आरोपी छोटी मछली हैं. इस मामले में कई बड़े मगरमच्छों पर भी कार्रवाई होनी तय है. क्योंकि इस अभूतपूर्व बहुचर्चित घटना को लेकर बिहार सीएमओ भी काफी सख्त है. खुद मुख्यमंत्री मॉनिटरिंग कर रहे हैं.

दोनों CM नीतीश के स्वजातीय अफसर
बीपीएससी पेपर लीक कांड में पावर कॉरिडोर से एक और खबर ये है कि जिन अधिकारियों से जुड़े मोबाइल नंबर सामने आये हैं. वो दोनों बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वजातीय हैं. जिस वर्ग से बिहार के मुख्यमंत्री हैं, उसी जाति से ये दोनों अफसर भी हैं.

IAS ने रखा अपना पक्ष
ईओयू की एफआईआर कॉपी सामने आने के बाद आईएएस अधिकारी की ओर से भी अपना पक्ष रखा गया है. गुरूवार 12 मई को दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक आईएएस अधिकारी ने कहा है कि उन्होंने एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इसकी सूचना आयोग के अधिकारी को दी. अफसर के मुताबिक उनके पास ग्रुप में प्रश्न पत्र आया था. एक जिम्मेदार अधिकारी के नाते उन्होंने उसे बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक को भेज दिया. ईओयू सूत्रों की मानें तो इस मामले में आईएएस से जानकारी ली जाएगी.

BPSC को सत्यता की पुष्टि के लिए भेजा प्रश्न पत्र
मीडिया में खबर आने के बाद आईएएस अफसर की छवि धूमिल करने और जांच की प्रक्रिया को गलत दिशा में मोड़ने का प्रयास बताया जा रहा है. एक प्रेस विज्ञप्ति सामने आई है, जिसमें इस बात का जिक्र है. साथ ही उस प्रेस रिलीज में यह भी लिखा गया है कि “संबंधित पदाधिकारी को WhatsApp Group पर प्राप्त हुआ. एक जिम्मेवार नागरिक एवं सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक पदाधिकारी होने के नाते बिहार लोक सेवा आयोग के संबंधित अधिकारी को सत्यता की पुष्टि के लिए प्राप्त प्रश्न पत्र को WhatsApp के माध्यम से अग्रसारित किया गया. वस्तुतः संबंधित पदाधिकारी द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग के सक्षम प्राधिकार को वायरल प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का मूल उद्देश्य इस अति महत्वपूर्ण मामले को सक्षम प्राधिकार के संज्ञान में लाना था.”

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