Chaiti Chhath 2022 : नहाय खाय के साथ आज से छठ महापर्व शुरू, जानिए कैसी है गंगा घाटों पर तैयारी

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PATNA : सूर्य की उपासना का महापर्व छठ व्रत (Chaiti Chhath) आज नहाय खाय के साथ शुरू हो गया है. यह व्रत साल में दो बार मनाया जाता है. एक चैत्र के महीने में जिसे चैती छठ (Chaiti Chhath) कहते हैं और दूसरा कार्तिक महीने में दिवाली के बाद मनाया जाता है. कार्तिक में मनाए जाने वाला छठ पर्व मुख्य माना जाता है. यह छठ अप्रैल में मनाया जाना वाला पर्व है. इस चैती छठ में व्रत के पहले दिन नहाय-खाय के व्रत का अनुष्ठान किया जाता है.

छठ व्रत की तरह ही चैती छठ (Chaiti Chhath) भी चार दिन का पर्व है. पहले दिन नहाया खाय, इसके बाद खरना, फिर गुरुवार को अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा. व्रत के चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त हो जाएगा. छठ करने वाले व्रती पूजन सामग्रियों और बाकी सामानों की खरीददारी में जुट गए हैं. खरना का प्रसाद बनाने के लिए आम की लकड़ी इकठ्ठा किया जा रहा है.

बाजार में सूप और दौरा की खूब बिक्री हो रही है. यह कह सकते हैं कि चार दिवसीय महापर्व के अनुष्ठान को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. लोक आस्था के इस महापर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह है. छठ के साथ-साथ चैती नवरात्र और रामनवमी पर्व को लेकर चारों ओर भक्ति का वातावरण देखा जा रहा है. स्थानीय जतराहीबाग दुर्गा मंडप में नवरात्रा का पाठ हो रहा है.

पटना के गंगाघाटों पर अर्घ्य की तैयारी अंतिम चरण में है. घाट तैयार किए जा रहे हैं. बैरिकेडिंग की जा रही है. प्रशासन ने खतरनाक घाटों पर अर्घ्य करने से मना किया है. पटना शहरी क्षेत्र स्थित कुल 26 घाटों पर चैती छठ का आयोजन होगा. इन 26 घाटों को छठ पर्व के लिए जिला प्रशासन द्वारा उपयुक्त घोषित किया गया है. इनमें पटना सदर अनुमंडल के 14 घाट, पटना सिटी अनुमंडल के सात घाट एवं दानापुर अनुमंडल के पांच घाट है शामिल हैं. प्रशासन की ओर से कुल 24 घाटों को खतरनाक घोषित किया गया है. इन खतरनाक घाटों पर आमजन के प्रवेश पर रोक है.

पटना के खतरनाक घाटों पर जाना प्रतिबंधित रहेगा. सुरक्षित घाटों की संख्या 26 है जिनके नाम पाटीपुल घाट, दीघा घाट, राजापुर पुल घाट, गेट नंबर 92 घाट, गेट नंबर 93 घाट, सूर्य मंदिर घाट गेट नंबर 83, मखदूमपुर दीघा घाट गेट नंबर 88, काली घाट, कदम घाट, कलेक्ट्रियट घाट, पटना कॉलेज घाट, कृष्णा घाट, गांधी घाट, राजेंद्र कृषि फॉर्म तालाब, लॉ कॉलेज घाट, चौधरी टोला घाट, महावीर घाट, घघा घाट, कंगन घाट, गुरुगोविंद सिंह घाट, दीदारगंज घाट, पीपापुल घाट दक्षिणी, नारियल घाट, नासरीगंज घाट, शाहपुर घाट, एसडीओ या कचहरी घाट हैं.

जबकि पीपापुल उत्तरी घाट, कटाही घाट, महाराज घाट, केशवराय घाट, अदालतघाट, मिश्री घाट, टीएन बनर्जी घाट, जजेज घाट आदि घाट खतरनाक घोषित किये गए हैं.

चैती छठ पूजा के पहले दिन नहाय खाय के साथ शुरू होता है और फिर अगले दिन खरना का व्रत किया जाता है. खरना व्रत की शाम में व्रती प्रसाद के रूप में गुड-खीर, रोटी और फल का सेवन करते हैं और फिर अगले 36 घंटों तक निर्जला व्रत रखते हैं. मान्यता है कि खरन पूजन से छठ देवी की कृपा प्राप्त होती है और मां घर में वास करती हैं. छठ पूजा में षष्ठी तिथि का अहम मानी जाती है इस दिन नदी या जलाशय के तट पर उदीयमान सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है और पर्व का समापन करते हैं.

संतान सुख और संतान के दीर्घायु और घर-परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए यह व्रत किया जाता है. कहा जाता है कि छठी मईया को भगवान सूर्य की बहन हैं. इसलिए इस दिन छठी मईया व भगवान सूर्य की पूजा की जाती है.