5 लाख घूस मांगने पर DM गिरफ्तार, हथियार का लाइसेंस देने के लिए मांग रहे थे पैसा

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DESK : झारखंड कैडर की IAS अधिकारी पूजा सिंघल के बाद अब CBI की टीम ने एक और आईएएस अधिकारी पर शिकंजा कसा है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने हथियार का लाइसेंस देने के बदले में 5 लाख रुपये घूस मांगने वाले DM को गिरफ्तार कर लिया है. आरोप है कि DM गन का लाइसेंस जारी करने के केस में चार लाख नकद और एक लाख रुपए चैक से रिश्वत ले रहे थे.

मामला गुजरात कैडर के आईएएस अफसर के. राजेश (IAS Kankipati Rajesh) से जुड़ा है. गुजरात में सौराष्ट्र जिले में कलेक्टर के पद पर कार्यरत रहे आईएएस अफसर कांकीपति राजेश को अनियमितता और भ्रष्टाचार सहित अन्य मामलों में गिरफ्तार किया गया है. मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले के. राजेश सौराष्ट्र के अलावा जूनागढ़, सुरेंद्रनगर और गांधीनगर में भी पोस्टेड थे. वर्तमान ये एनआरआई और सामान्य प्रशासन विभाग के एआरटी डिवीजन के संयुक्त सचिव हैं.

आपको बता दें कि 2011 बैच के आईएएस अधिकारी राजेश का तबादला 22 जून 2021 को गांधीनगर किया गया था. सीबीआई की टीम पड़ताल के क्रम में पांच बार सुरेन्द्रनगर आई थी. सीबीआई की टीम ने देर रात आईएएस अधिकारी के राजेश के आवास पर छापेमारी की और इन्हें अरेस्ट कर लिया.

केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि कहा कि हाल ही में सीबीआई को शिकायत मिली थी कि जब के राजेश सुरेंद्रनगर जिले के कलेक्टर थे. राजेश ने कथित तौर पर भूमि सौदों और अपात्र व्यक्तियों को हथियार लाइसेंस मंजूर करने में रिश्वत ली थी. सीबीआई ने कहा कि रिश्वत का पैसा सूरत के एक व्यापारी मेमन के बिचौलिए के जरिए उन तक पहुंचता था.

छापेमारी के संबंध में सीबीआई की ओर से बयान जारी कर बताय गया कि गुरुवार देर रात गांधीनगर में आईएएस अधिकारी के आवास और सूरत में कुछ अन्य परिसरों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश में उनके पैतृक स्थान पर तलाशी ली गई.

सीबीआई ने बताया कि टीम ने आईएएस अधिकारी के बिचौलिए के रूप में काम करने वाले मोहम्मद रफीक मेमन को सूरत से गिरफ्तार किया है. आरोप है कि मेमन ही उनके लिए रिश्वत के पैसे इकट्ठा करता था. मामले की जांच रिटायर्ड एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी द्वारा की जा रही है.

आपको बता दें कि के. राजेश ने पांडिचेरी सेंट्रल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स में बीटेक किया है. यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2010 में 103 रैंक हासिल की. 2013 में जूनागढ़ में सहायक कलेक्टर के रूप में सेवाएं दी. फिर सूरत में सहायक कलेक्टर, सूरत में ही जिला विकास अधिकारी के रूप में कार्य किया.