BPSC पेपर लीक कांड: कौन है ‘दागी’ BDO जयवर्धन गुप्ता जिससे EOU कर रही पूछताछ, पटना में निगरानी ने एक लाख घूस लेते रंगेहाथ पकड़ा था?

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PATNA : बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 67वीं प्रारंभिक परीक्षा (PT) को प्रश्न पत्र लीक होने के कारण रविवार को रद्द कर दिया गया. इस मामले में नीतीश सरकार की देशभर में भारी फजीहत हो रही है. सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम को जांच का जिम्मा सौंपा है. तकनीकी रूप से तेजतर्रार IPS अफसर सुशील कुमार के नेतृत्व में एक एसआईटी भी गठित की गई है. महज 25-30 घंटे के भीतर इस एसआईटी को कई क्लू मिले हैं. जिसके आधार पर जांच और पूछताछ की जा रही है. इसी कड़ी में भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड के बीडीओ का नाम सामने आया है, जिससे पूछताछ के लिए पटना लाया गया है.

BDO जयवर्धन गुप्ता से पूछताछ
मंगलवार की सुबह भोजपुर जिले के बड़हरा में प्रखंड विकास पदाधिकारी के पद पर तैनात बीडीओ जयवर्धन गुप्ता की गिरफ्तारी की खबर मीडिया में आई थी. हालांकि आधिकारिक रूप से बीडीओ जयवर्धन गुप्ता की गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने की बात का खंडन किया गया है. विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि जयवर्धन गुप्ता को पूछताछ के लिए बुलाया गया था. क्योंकि जिस वीर कुंवर सिंह कॉलेज परीक्षा केंद्र पर हंगामा हुआ था. जयवर्धन गुप्ता को उस बीपीएससी (Bihar Public Service Commission) की परीक्षा केंद्र का सेंटर मजिस्ट्रेट बनाया गया है.

पहले से दागी हैं BDO जयवर्धन गुप्ता
आपको बता दें कि बीडीओ जयवर्धन गुप्ता पहले से दागी रहे हैं. भोजपुर जिले में पोस्टिंग से पहले सरकार ने इनका पावर छीन लिया था. काफी लंबे समय तक जयवर्धन गुप्ता को वेटिंग फॉर पोस्टिंग की लिस्ट में रखा गया था. पिछले साल बिहार में पंचायत चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यभर में लगभग 60 दागी पदाधिकारियों की पोस्टिंग में फेरबदल किया गया था, जिसमें जयवर्धन गुप्ता का भी नाम शामिल था, जिससे बीपीएससी पेपर लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई की टीम पूछताछ कर रही है.

खुद BPSC में हासिल किया था 835वां रैंक
जिस बीडीओ से पूछताछ हो रही है. इनका चयन बीपीएससी में लगभग 9 साल पहले हुआ था. इनका रोल नंबर 300210 था और बीपीएससी की 53वीं, 54वीं और 55वीं सम्मिलित प्रतियोगिता परीक्षा की मेरिट लिस्ट में इन्होंने 835वां रैंक हासिल किया था. जिसमें इनका चयन प्रखंड विकास पदाधिकारी के रूप में हुई. ये मूल रूप से बिहार के बांका जिले के रहने वाले हैं और पिछले साल 15 मार्च को इनकी तैनाती भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड में की गई थी.

पटना में निगरानी ने दबोचा था
आपको बता दें कि लगभग चार साल पहले राजधानी पटना स्थित घोसवरी प्रखंड के बीडीओ जयवर्धन गुप्ता को निगरानी विभाग की टीम ने एक लाख रुपये घूस लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था. दागी बीडीओ जयवर्धन की गिरफ्तारी मोकामा के मोलदियार टोला स्थित उनके किराये के मकान से हुई थी. निगरानी के पुलिस उपाधीक्षक पारस नाथ सिंह के नेतृत्व में धावादल ने इन्हें एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ अरेस्ट किया था. आपको बता दें कि यहां बीडीओ जयवर्धन गुप्ता मोल दियार टोला के रहने वाले छोटन सिंह के मकान में किराये पर रह रहे थे.

एक लाख घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार
बिहार के दैनिक अखबार प्रभात खबर में 22 अगस्त 2018 को छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, पटना स्थित घोसवरी थाने के मालपुर गांव के रहने वाले दिनेश गोप ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज करायी थी कि बीडीओ जयवर्धन गुप्ता एक योजना की प्रशासनिक स्वीकृति देने के एवज में एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग कर रहे हैं. शिकायत के सत्यापन के बाद विजिलेंस ने इस बीडीओ को धर दबोचा था.

गिरफ्तारी के बाद पद से हटे
मोकामा में गिरफ्तारी के बाद बीडीओ जयवर्धन को पद से हटा दिया गया था. दावा किया जा रहा है कि ये वही बीडीओ है, जिनसे पूछताछ किया जा रहा है. हालांकि अबतक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. आपको बता दें कि पिछले साल दागी और आरोपित बीडीओ का तबादला पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया गया था. जिसमें इनका नाम शामिल था.

SP सुशील कुमार की टीम में कौन-कौन
आपको बता दें कि बीपीएससी की 67वीं पीटी के पेपर लीक मामले में काफी तेजी से कार्रवाई चल रही है. एसपी सुशील कुमार के नेतत्व में बनी 14 सदस्यीय एसआईटी की टीम को कई क्लू मिले हैं. भोजपुर जिले में एसपी रह चुके सुशील कुमार की टीम में साइबर एक्सपर्ट से लेकर ट्रेंड डीएसपी और इंस्पेक्टर तक को शामिल किया गया है.

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जयवर्धन गुप्ता, प्रखंड विकास पदाधिकारी, बड़हरा

कब और कहां से हुआ वायरल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी जांच में पता चला है कि रविवार को पीटी के पेपर का सबसे पहले सुबह 10:34 बजे स्कैन किया गया था. यह पेपर सबसे पहले 11:35 बजे पटना के एक कोचिंग संस्थान के एक छात्र के वाट्सएप पर पहुंचा और फिर वायरल हो गया.

SIT सूत्रों का दावा
सू्त्रों के अनुसार एसआइटी ने उस कोचिंग संस्थान के संचालक से संपर्क कर उस छात्र को बुलाया और पूछताछ की. एसआइटी के सूत्रों का दावा है कि पूरे मामले का खुलासा जल्द ही कर दिया जायेगा. इधर इओयू ने इस संबंध में अज्ञात के खिलाफ मामला (20/22) दर्ज किया है. एसआइटी ने आरा के अलावा करीब दो दर्जन लोगों को इओयू कार्यालय बुलाकर भी पूछताछ की गई.