Bihar : DSP, इंस्पेक्टर और दो थानेदार समेत 7 पुलिसवालों पर केस, गवाह के गुप्तांग में पेट्रोल डालने का आरोप

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MADHEPURA : बिहार (Bihar) के मधेपुरा जिले में साथ पुलिसवालों (Madhepura Police) के खिलाफ मामला (case) दर्ज कराया गया है. इसमें कई सीनियर पुलिस अफसरों (senior police officers) के भी नाम शामिल है, जो बड़े पद पर पोस्टेड हैं. जिले के चर्चित मनोहर मेहता हत्याकांड (murder case) के गवाहों की पिटाई मामले में इनके खिलाफ शिकायत की गई है.

मामला मधेपुरा (Madhepura) जिले के उदाकिशुनगंज (Udakishunganj) का है. बिहारीगंज थाने (Bihariganj Police Station) के रामपुर डेहरु गांव के रहने वाले मनोहर मेहता के हत्या मामले में जिन गवाहों की बेरहमी से पिटाई की गई थी. उसी मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की गई है. उदाकिशुनगंज अनुमंडल व्यवहार न्यायालय में दायर परिवाद में उदाकिशुनगंज के एसडीपीओ सतीश कुमार, सर्किल इंस्पेक्टर शशि भूषण सिंह, उदाकिशुनगंज थानाध्यक्ष जेपी चौधरी, बिहारीगंज के (निलंबित) थानाध्यक्ष रणवीर कुमार, उदाकिशुनगंज के जमादार सुरेंद्र सिंह और तकनीकी सेल के दो कर्मी को आरोपी बनाया गया है.

परिवाद उदाकिशुनगंज अनुमंडल व्यवहार न्यायालय में शिव कुमार अनुमंडल मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष दायर किया गया है। परिवाद पत्र की संख्या 80 वर्ष 2022 दिनांक 21 अप्रैल 2022 है. परिवाद में कहा गया है कि मनोहर की हत्या के बाद इस कांड के गवाहों को पुलिस गवाही नहीं देने के लिए दबाव बना रही थी. इस बीच चौकीदार ने श्यामल को यह कहते हुए थाना बुलाया कि पूछताछ के लिए एसडीपीओ उसे बिहारीगंज थाना पर बुलाए हैं.

इसके बाद जब श्यामल थाना पर गया तो वहां पहले से उपरोक्त सभी अभियुक्त मौजूद थे. यहां भी नामजद अभियुक्त के विरुद्ध गवाही नहीं देने का दबाव दिया जाने लगा. इंकार करने पर बुरी तरह मारपीट की गई. गुप्तांग में पेट्रोल भी डाला गया. परिवाद के प्रार्थी बिहारीगंज थाना क्षेत्र के रामपुर डेहरू वार्ड संख्या नौ के नीरज कुमार (26) है.

नीरज का कहना है कि शाम को जब वह अन्य ग्रामीणों के साथ वह थाना गया तो मारपीट की वजह से अपने भाई के चीखने की आवाज सुनी. एसडीपीओ सतीश कुमार और इंस्पेक्टर शशि भूषण सिंह से जब इसका कारण पूछा तो दोनों पदाधिकारी ने तैश में आते हुए कहा कि यहां से भागो नहीं तो सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में तुमपर भी केस कर देंगे. डर से वह ग्रामीणों के साथ घर लौट गया. बाद में उसे पता चला कि उसके भाई को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है.

वहां जाकर देखा कि चार पुलिसकर्मी की मौजूदगी में बेड से बांध कर श्यामल का इलाज किया जा रहा था. नीरज का आरोप है कि पुलिसकर्मी की पिटाई और बिजली शार्ट सर्किट से और गुप्तांग में पेट्रोल डालने की वजह से श्यामल ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया था. पुलिस ने श्यामल के पास रहे 23 हजार रुपए भी छिन लिए थे.

परिवाद में नीरज का आरोप है कि सभी अभियुक्तों ने 19 अप्रैल को उसके घर आकर धमकी दी कि शिकायत की तो पूरे परिवार को मारपीट कर बर्बाद कर देंगे. साथ ही एसडीपीओ, सर्किल इंस्पेक्टर और उदाकिशुनगंज थानाध्यक्ष ने सरेआम धमकी दी कि 10 लाख रुपए जल्दी जमा करो, अन्यथा सभी को मनोहर हत्याकांड में फंसा देंगे.

लिहाजा यह मामला चश्मदीद श्यामलकिशोर मेहता और संतोष कुमार के बर्बरता पूर्ण पिटाई के खिलाफ दायर किया गया है. आरोप है कि इन पुलिस अधिकारियों ने चश्मदीद और स्वजन के साथ बेरहमी से मारपीट की. जिसमें दोनों बुरी तरह जख्‍मी हैं. पुलिस पिटाई के कारण चश्मदीद का दिमागी हालत खराब हो गया है, जो अभी पटना पीएमसीएच में ईलाजरत है.