Sundarlal Bahuguna : नहीं रहे हिमालय के रक्षक, कोरोना से निधन

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मशहूर पर्यावरणविद और चिपको आंदोलन (Chipko movement) का नेतृत्व करने वाले सुंदरलाल बहुगुणा (Sundarlal Bahuguna) नहीं रहे। 8 मई को कोरोना से संक्रमित होने के बाद उन्हें एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया गया था। ऋषिकेश के एम्स (AIIMS) में उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान उन्होंने 21 मई को अपनी आखिरी सांस ली।

9 जनवरी 1927 को मरोड़ा, उत्तराखंड में जन्में सुंदरलाल बहुगुणा वृक्ष प्रेमी के रूप में जाने जाते थे। वो एक मशहूर गढ़वाली पर्यावरणविद थे। उनका निधन 94 वर्ष की उम्र में कोरोना से संक्रमित होने के कारण 21 मई को हो गया। उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित भी किया गया था।

चिपको आंदोलन के लीडर

महात्मा गांधी के सिद्धान्तों पर चलने वाले सुंदरलाल ने 70 के दशक में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अभियान चलाया था। उनके अभियान का पूरे देश पर व्यापक असर पड़ा। उनकी प्रेरणा से 1973 में उत्तराखंड में चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इस आंदोलन की शुरुआत जंगलों के बचाव के लिए किया गया था।

उत्तराखंड के बाद ऐसे आंदोलन देश के अलग-अलग क्षेत्रों में भी देखे गए। चिपको एक शांति पूर्ण आंदोलन था। इसमें गांव के लोग खास कर महिलाएं और बच्चे पेड़ से चिपक कर खड़े रहते थे ताकि सरकार उन पेड़ों को ना काट सके।

कहा गया हिमालय का रक्षक

सुंदरलाल बहुगुणा ने अपने जीवन काल में कई आंदोलनो की अगुवाई की। उन्होंने छुआछुत के मुद्दे से ले कर महिलाओं के हक़ के लिए आवाज़ उठाई
महात्मा गांधी को अपनी प्रेरणा मानने वाले बहुगुणा ने हिमालय के बचाव का काम शुरू किया और अपने पूरे जीवन काल में इसके लिएआवाज़ उठाते रहे। इस कारण उन्हें “हिमालय का रक्षक” भी कहा गया।