मानसून सत्र का हुआ आगाज़, पहले दिन ही हुआ हंगामा

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संसद का इस वर्ष का दूसरा सत्र यानी की मानसून सत्र आज, 19 जुलाई से शुरू हो गया है। यह सत्र 13 अगस्त को समाप्त होगा। इस सत्र के शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस महामारी ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में लिया हुआ है, इसलिए हम चाहते हैं कि संसद में भी इस महामारी के संबंध में सार्थक चर्चा की जाए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को सभी व्यावहारिक सुझाव सभी सांसदों से मिलें हैं, ताकि महामारी के खिलाफ लड़ाई में नयापन लाया जा सके और कमियों को भी पूरा किया जा सके। पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही है, इसलिए कोई भी वैक्सीन लगवाने से पीछे न हटें। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा आप बाहों पर वैक्सीन लगवाने के बाद ही बाहुबली बनेंगे।

नए मंत्रियों पर सभी को है गर्व

बता दें, कुछ दिनों पहले ही नए कैबिनेट के गठन किया गया है। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि इस बात पर सभी को गर्व होना चाहिए कि कई महिलाओं, एससी (SC) और एसटी (ST) समुदाय के कई लोगों ने मंत्री के रूप में शपथ ली है। कई नए मंत्री किसानों के बच्चे हैं और ओबीसी (OBC) समुदायों से भी जुड़े हैं।

कुल 19 बैठकों का होगा आयोजन

संसदीय कार्य मंत्रालय के अनुसार, सत्र की 19 बैठकों के दौरान, 29 विधेयकों और 2 वित्तीय मदों सहित 31 सरकारी व्यावसायिक मदों पर विचार किया जाएगा। अध्यादेशों की जगह छह विधेयक लाए जाएंगे। लोकसभा की बैठक सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी, जब तक कि अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा अन्यथा निर्देशित न किया जाए। निजी सदस्यों के व्यवसाय के लेन-देन के लिए चार दिन आवंटित किए गए हैं, जो दोपहर के भोजन के बाद के सत्र में लिए जा सकते हैं।

हालांकि सत्र के पहले दिन विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में विपक्ष के हंगामें के बीच कहा कि कुछ लोगों को केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में दलित, महिलाओं और पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व रास नहीं आ रहा है। यह बात उन्होंने तब कही, जब वह अपनी नई मंत्रिपरिषद (Cabinate) का परिचय करा रहे थे। हंगामें के चलते उन्होंने लिखित में इसे सदन के पटल पर रखा। इसके बाद प्रश्नकाल (Question Hour) में हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

मंत्रिपरिषद में दलित, महिला, और अन्य पिछड़ा वर्ग को मिला प्रतिनिधित्व

लोकसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे नए सांसदों के शपथ ग्रहण से शुरू हुई। इसके बाद प्रधानमंत्री ने संसद का मंत्रिपरिषद से परिचय कराना चाहा, तो विपक्ष की ओर से हंगामा शुरू हो गया। हंगामे के बीच प्रधानमंत्री ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि उन्हें नई मंत्रिपरिषद का परिचय नहीं कराने दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि नई मंत्रिपरिषद में दलित, महिला, और अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वालों को बड़ा प्रतिनिधित्व मिला है। विपक्ष को इसपर उत्साह जताते हुए इसकी प्रशंसा करनी चाहिए थी। हालांकि विपक्ष इसपर हंगामा कर यह साबित कर रहा है कि उसे पिछड़ों, किसानों और ग्रामीण परिवेश से आने वालों का मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व रास नहीं आ रहा है।

दिवंगत हस्तियों को किया गया याद

वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने इसे संसद की स्वस्थ परंपरा के खिलाफ बताया। लोकसभा अध्यक्ष ने यहां तक कहा कि विपक्ष भारतीय लोकतंत्र और संसद की गरिमा गिरा रहा है। बाद में उन्होंने पिछले सत्र और इस सत्र के बीच इस दुनिया में नहीं रहे 40 विशिष्ट लोगों का विषय रखा। इसमें उन्होंने दिवंगत फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार और ओलंपिक खिलाड़ी रहे मिल्खा सिंह (Milkha Singh) का भी जिक्र किया। निधन संबंधित विषय रखे जाने के दौरान भी हंगामा जारी रखने पर लोकसभा अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ती जताई, जिसके बाद माहौल थोड़ी देर के लिए शांत हुआ। हालांकि इसके हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

प्रश्नकाल से पूर्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने प्रधानमंत्री के मंत्रिपरिषद परिचय के दौरान हंगामे के लिए कांग्रेस (Congress) को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि नियम और पंरपरा के तहत मंत्रिपरिषद में होने वाले हर छोटे-बड़े फेर बदल की जानकारी सदन को दी जाती है। उनके सदन में रहते हुए पिछले 24 वर्षों में कभी इस परंपरा को तोड़ा नहीं गया। यह बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है और स्वस्थ संदीय परंपरा के खिलाफ है।