Micro-oxygen chamber : ऑक्सीजन के महत्व को समझते हुए इन बच्चों ने लगाए 750 पौधें

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पेड़ की ज़रूरत तो सब जानते हैं पर इस कोरोना वायरस महामारी ने इसकी महत्व को भी बता दिया है। कोविड की दूसरी लहर ने हमें ऑक्सीजन के महत्व का एहसास कराया है। इसी को ध्यान में रखते हुए पंजाब (Punjab) के लुधियाना (Ludhiana) में बच्चों के एक समूह ने 750 पेड़ लगाकर माइक्रो ऑक्सीजन चैंबर (micro-oxygen chamber) का निर्माण किया। यह एक कोशिश थी कि एक छोटा जंगल बनाया जाए जो ‘बच्चों के द्वारा और बच्चों के लिए’ हो।

यह वृक्षारोपण अभियान IRS अधिकारी रोहित मेहरा (Rohit Mehra) और उनकी पत्नी गीतांजलि (Geetanjali Mehra) मेहरा की देखरेख में चलाया गया, जो शहर में अपनी हरित पहल के लिए जाने जाते हैं। इस शानदार पहल में 10 स्कूली छात्र प्रतिभा शर्मा, माधवी शर्मा, वैभव कपूर, ध्रुव मेहरा, उदय मेहरा, दिया भरारा, लावन्या सहगल, वीरांश भरारा, नित्या बस्सी और दिशिता भरारा हिस्सा लिया।

बच्चों ने करीब 250 वर्ग गज में पौधरोपण किया। लुधियाना के राख बाग (Rakh Bagh) में बच्चों ने कम से कम 60 देशी प्रजातियां लगाईं। कोरोना की दूसरी लहर में देश ने अभूतपूर्व ऑक्सीजन संकट का सामना किया। कई लोगों की जान ऑक्सीजन की कमी की वजह से चली गई। यह अभियान पेड़ को बचाने की एक पहल है क्योंकि पेड़ प्राकृतिक ऑक्सीजन का एकमात्र स्रोत है।

यह दुनिया में बच्चों द्वारा बनाया गया पहला जंगल है, जो बच्चों के लिए है। इस टीम को भारतीय ग्रीन वारियर्स के रूप में जाना जाता है और इसमें 10 स्कूल जाने वाले बच्चे हैं। इस अभियान में भाग लेने वाले सभी बच्चों ने दो साल की अवधि के लिए माइक्रो फॉरेस्ट को बचाने, इसकी खाद और सिंचाई करने का संकल्प लिया, जब तक कि यह अपने आप टिकाऊ न हो जाए।