Happy Birthday Rahul Gandhi : 51 के हुए देश के सबसे युवा नेता

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राजनीति के क्षेत्र में, भारत में, एक से एक हस्तियों ने इस धरती पर जन्म लिया है। आज ऐसी ही एक महान हस्ती का जन्मदिन है।


आज 51 साल के सबसे युवा नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का जन्मदिन है।


गांधी-नेहरू वंश से आने वाले राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को नई दिल्ली में हुआ था।


पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) एवं सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के पुत्र राहुल का बचपन दिल्ली और देहरादून के बीच बीता।


साल 1981 से 1983 के बीच उन्होंने उत्तराखंड के देहरादून में दून स्कूल में पढ़ाई की जहां उनके पिता भी पढ़े थे।


वह अपने माता-पिता की दो संतानों में बड़े हैं और प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) के बड़े भाई हैं।


राहुल की पढ़ाई में सबसे पहली बार व्यवधान तब हुआ जब उनकी दादी इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की 1984 में हत्या कर दी गई।


वे स्नातक की पढ़ाई करने के लिए इन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज (St. Stephen’s College) में दाखिला लिया, फिर बाद में हार्वर्ड विश्वविद्यालय (Harvard University) चले गए।


इसके बाद सन 1995 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज (Trinity College) से एम.फिल. की उपाधि प्राप्त की। परिवार की सुरक्षा के खतरे के कारण यहाँ उनका नाम सु राहुल विंसी लिखवाया गया था।

स्नातक करने के बाद राहुल ने एक मॉनिटर ग्रुप नाम की सलाहकार फर्म के साथ लंदन में तीन साल तक काम किया इस ग्रुप की स्थापना माइकल पोर्टर ने की थी।


राहुल गांधी की सियासी पारी की शुरुआत साल 2004 में हुई। मई 2004 में उन्होंने उत्तरप्रदेश में अपने पिता की संसदीय सीट अमेठी से चुनाव लड़ा और लोकसभा के सदस्य के तौर पर राजनैतिक जीवन की शुरुआत की।

राहुल को 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस को मिली बड़ी राजनैतिक जीत का श्रेय दिया गया है। उनकी राजनैतिक रणनीतियों में जमीनी स्तर की सक्रियता पर बल देना, ग्रामीण जनता के साथ गहरे संबंध स्थापित करना और कांग्रेस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने की कोशिश करना प्रमुख हैं।


वे 16 दिसंबर 2017 से 3 जुलाई 2019 तक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। वे 19 जनवरी 2013 से दिसंबर 2017 तक कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी रहे।


साल 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल ने यूपी के अमेठी और केरल के वायनाड दो जगहों से चुनाव लड़ा। अमेठी सीट पर उन्हें स्मृति ईरानी के हाथों हार का सामना करना पड़ा जबकि वायनाड सीट से वह विजयी हुए।