Corona मरीजों में पनपी एक और नई बीमारी, जानिए क्या है लक्षण और उपचार

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बीते डेढ़-दो साल से बीमारियों ने ऐसी तबाही मचाई है कि पूरी दुनिया में कोहराम मच गया है। कोरोना (Corona) संक्रमण के बाद ब्लैक फंगस(Black Fungus), फिर व्हाइट फंगस(White Fungus) फिर येल्लो फंगस(Yellow Fungus) और अब एस्परजिलस.. भारत के गुजरात मे एस्परजिलस (Aspergillus) नाम का संक्रमण बीते दिनों देखने को मिला है।

ये समस्या भी उन्हीं लोगों में पनप रही है जो कोरोना (Corona ) के शिकार हैं या फिर हाल ही में कोरोना से उबरे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार गुजरात (Gujrat) के राजकोट (Rajkot) के सिविल अस्पताल में इस बीमारी के मरीजों की संख्या 100 से भी ज्यादा है। इस बीमारी में व्यक्ति के फेफड़ों में कफ जमने लगता है। कोरोना वायरस भी मनुष्य के फेफड़ों पर ही हमला करता है।

राजकोट के एक लंग्स स्पेशलिस्ट ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि यह संस्करण आम दिनों में भी लोगों में देखा गया है। अभी यह संस्करण कोरोना मरीज़ों में पनपना चिंता का विषय है। राजकोट में एस्परजिलस के जितने भी मरीज़ पाए गए हैं सभी कोरोना से संक्रमित थे। वहाँ रोजाना इस बीमारी से संक्रमित 3-4 मरीज मिल रहे हैं।

क्या होते हैं एस्परजिलस के लक्षण?

एस्परजिलस के लक्षण देखने मे निमोनिया (Pneumonia) जैसे लगते हैं। बुखार आना, जुकाम होना, कफ जमना और कफ के साथ खून आना इस के लक्षणों में शामिल हैं। एस्परजिलस में प्रतिरोधक क्षमता तेजी से कम हो जाती है। इस वजह से कोरोना मरीजों को इसे लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

व्हाइट फंगस का ही एक रूप है एस्परजिलस

कैंडिंडा (Candinda) और एस्परजिलस, व्हाइट फंगस (White Fungus) के दो रूप होते हैं। इन दोनों में कैंडिंडा खतरनाक होता है। बीते दिनों लोगों में कैंडिंडा भी देखने को मिला था। कैंडिंडा में स्किन में इन्फेक्शन, मुंह में छाले, छाती में संक्रमण और अल्सर जैसी समस्या हो सकती है। जबकि एस्परजिलस का संक्रमण फेफड़ों, सांस नली और कॉर्निया पर असर डालता है। इससे अंधेपन का खतरा भी रहता है।

कैसे किया जाता है एस्परजिलस का इलाज?

एस्परजिलस ब्लैक फंगस (Black Fungus) जितना खतरनाक नहीं होता है, लेकिन जरूरी है कि समय रहते ही इसका इलाज शुरू किया जाए। एस्परजिलस फेफड़ों से जुड़ी समस्या है, जिसमें फेफड़ों में कफ जमने लगता है और कफ के साथ खून आने लगता है। इससे मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
हालांकि, अच्छी बात यह है कि इसका इलाज होरिकोनाजोल टैब्लेट से ही हो जाता है। इस टैब्लेट की कीमत 700 से 800 रुपए के बीच होती है। मरीजों को रोजाना इसकी दो खुराक दी जाती हैं। इसका इलाज 21 दिनों तक चलता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या ज्यादातर उन मरीजों में देखी गई है, जो करीब 20-30 दिन पहले ही कोरोना से ठीक हुए हैं।