ब्लास्ट के आठ साल : बोधगया सीरियल बम ब्लास्ट, 33 मिनट, नौ धमाके, और हिल गया था बिहार

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वो 7 जुलाई, 2013 की सुबह थी, जब छह बजे बोधगया में महाबोधि मंदिर और उसके आसपास एक के बाद एक नौ विस्फोट हुए थे। आतंकियों ने महाबोधि वृक्ष के नीचे भी दो बम लगाए थे। एक सिलेंडर बम रखा गया था, जिसमें टाइमर लगा हुआ था। इन सबकी साजिश बड़ी घटना को अंजाम देने की थी।

विस्फोट के बाद सुरक्षा बलों ने तीन बिना फटे और निष्क्रिय किए हुए बम भी बरामद किए थ। इन धमाकों का एक ही मकसद था कि सुबह-सुबह जब बौद्ध अनुयायी प्रार्थना के लिए आएं तो खून-खराबा हो। तेरगर मठ में फटे तीन बम खेल के मैदान में लगाए गए थे, जहां नए भिक्षु फुटबॉल खेलते थे।

ब्लास्ट के समय विदेशी तीर्थयात्री प्रार्थना के लिए जमा थे। पांच धमाके महाबोधि मंदिर परिसर के भीतर हुए थे, तीन तेरगर मठ में हुए थे जहां करीब 200 प्रशिक्षु भिक्षु रहते थे और एक-एक धमाका 80 फुट की बुद्ध प्रतिमा के पास और बाइपास के करीब बस स्टैंड पर हुए थे।

बिहार के गया में भगवान बुद्ध की तपोभूमि बोधगया आज भी आतंकियों के निशाने पर है। इसका जीता जागता उदाहरण सन 2013 से लेकर 2017 तक दो बार आतंकियों ने बोधगया महाबोधि मंदिर को अपना निशाना बनाया था। बावजूद इसके पुलिस और सरकार गंभीरता से लेते हुए बोधगया को हाई एलर्ट किया गया और महाबोधि मंदिर के सुरक्षा का पुख्ता इंतज़ाम किया।

इसको लेकर मंदिर परिषर से बाहरी क्षेत्र पर स्पेशल पुलिस फोर्स तैनात की गई है और जगह पर सीसीटीवी कैमरे तथा मेटलडिडक्टेर भी लगाया है ताकि परिंदा भी पर ना मार सके ।

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कभी भी आतंकी , महाबोधि मंदिर को निशाना बना सकते हैं। अगर देखा जाए तो उग्रवादियों और आतंकवादियों के निशाने पर आज भी महाबोधि मंदिर है। इस बाबत आज गया के आला प्रशासनिक पदाधिकारियों ने मंदिर का मुआयना किया।